प्रस्तावना “विष के दाँत” एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कहानी है। यह केवल एक घटना की कहानी नहीं है, बल्कि समाज में फैले अमीरी-गरीबी के अंतर, दिखावे, अहंकार और बिगड़ते संस्कारों पर गहरा व्यंग्य है। लेखक ने बहुत साधारण घटनाओं के माध्यम से यह दिखाया है कि असली ज़हर (विष) कहाँ छिपा हुआ है। कहानी की…
Chapter Introduction “श्रम विभाजन और जाति प्रथा” डॉ. भीमराव अंबेडकर का एक विचारपूर्ण लेख है। इस पाठ में वे एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल उठाते हैं —क्या जाति प्रथा सच में समाज के लिए उपयोगी है? कुछ लोग कहते हैं कि जाति व्यवस्था भी श्रम विभाजन का एक रूप है।लेकिन अंबेडकर इस बात को गलत साबित…